मैं…
अपनी, सिर्फ़ अपनी परेशानियों से जूझता हुआ
जो चीजें न हासिल कर पाया, उन्हें कोसता हुआ
मैं..
हर पल, सुकून की करता हूँ तलाश
समय बीत जाने पर होता हूँ निराश
असली हकीकत से कोसों दूर
अपने शीशमहल में, अपनी ही मद में चूर
मैं...अपने जीवन संघर्ष को सर्वोपरि मानता हुआ
अपनी, सिर्फ़ अपनी परेशानियों से जूझता हुआ
जो चीजें न हासिल कर पाया, उन्हें कोसता हुआ
मैं...
छोटी-छोटी खुशियों को हूँ नकारता
रोज़मर्रा की आपा-धापी में हूँ गम तलाशता
असली मुद्दे से हटकर, बेतुकी हरकतों में मशगूल
दूसरों की मायूसियों, विवशताओं को देता नहीं कोई तूल
मैं...बेझिझक, सभी को बेजान, बेगाना जताता हुआ
अपनी, सिर्फ़ अपनी परेशानियों से जूझता हुआ
जो चीजें न हासिल कर पाया, उन्हें कोसता हुआ
मैं...
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